मैं तरुण कुमार आप लोगों केलिए मॉडर्न इतिहास से “वेलेजली एवं साम्राज्य विस्तार” टाॅपिक का नोट क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत कर रहे हैं। माडर्न इतिहास में वेलेजली एवं साम्राज्य विस्तार एक बहुत ही महत्वपूर्ण टापिक है। यूपीएससी में इसका अलग स्थान है।जो नीचे दिया गया है।👇
वेलेजली एवं साम्राज्य विस्तार. (1798-1805)
→ वेलेजली जब भारत में गवर्नर जनरल के रूप में आया तब कंपनी एक राजनीतिक शक्ति के रूप में मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित हो चुकी थी। जैसे बंगाल, अवध, कोरिक, मैसूर इत्यादि क्षेत्रों पर कंपनी का प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष प्रभाव स्थापित हो चुका था।
→ हालाँकि मैसूर को शक्ति का पूरी तरह से दमन नहीं हुआ था। भारत में सबसे शक्तिशाली क्षेत्रीय राज्य मराठे भी कंपनी के नियंत्रण से बाहर थे। निजाम एवं उत्तर-पश्चिम भारत भी अंग्रेजों के प्रभाव से बाहर था।
→ इसके अतिरिक्त नेपोलियन अरोप में एक नई चुनौती बनकर उगरा था। तथा भारत से ब्रिटेन के संपर्क को वह बाधित करना चाहता था। नेपोलियन इस उद्देश्य से रूस से भी संपर्क स्थापित कर रहा था।
भारत में अंग्रेजों की स्थिति को और मजबूत बनाने तथा साम्राज्य की सुरक्षा के लिए वेलेजली के द्वारा उठाये गये कदम
युद्ध – 1799 में चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध एवं मैसूर का मारलीय साम्राज्य में विलय
→1803-1805 – द्वितीय आंग्ल मराठा युद्ध, मराठों की पराजय और मराठों ने सहायक संधि पर हस्ताक्षर किया।
→ वेलेजली ने भारत में अंग्रेजों की स्थिति को मजबूत करने के लिए कुछ अन्य उपाय भी किये जैसे गोवा में पुर्तगालियों से बातचीत कर ब्रिटिश सैनिकों को तैनात किया
→ डेनमार्क और नेपोलियन के अच्छे संबंध थे। वेलेजली के भारत में डेनमार्क के व्यापारिक केन्द्र सेरामपुर (बंगाल), एवं “ट्रेंकोबार (तमिलनाडू) पर कब्जा किया।
– नेपोलियन के विरुद्ध भारत से एक सेना मिस भेजी गयी।
~ मोरीसस पर आक्रमण के लिए भी वेलेजली ने भारत में एक सेना तैयार रखी। (मोरीसस में फ्रांसीसियों का नौसैनिक बेस था।)
→ वेलेजली ने सहायक संधि प्रणाली का बड़े पैमाने पर उपयोग किया। बड़ी संख्या में भारतीय राज्यों को सुरक्षा की दृष्टिकोण से कंपनी पर निर्भर बनाया। जैसे हैदराबाद, मैसूर, तंजौर, अवध, पेशवा, भोंसले, सिंधिया इत्यादि।”
सहायक संधि प्रणाली
•भारत में साम्राज्य विस्तार के लिए मुख्यतः अंग्रेजों के द्वारा अपनायी गयी नीति, इसके अंतर्गत मुख्य तौर पर रक्षा की दृष्टिकोण से भारतीय राज्यों की कंपनी पर निर्भर बनाया जाता था।
नोट-(i.) संभवतः इस प्रणाली का जनक डूप्ले था। अंग्रेजों की तरफ से प्रथम गवर्नर था। क्लाइव ।इसने 1765 ई. में अवध के साथ सहायक संधि की।
(ii.)सहायक संधि प्रणाली का सर्वाधिक उपयोग करने वाला गवर्नर था वेलेजली
(iii.)वेलेजली ने रक्षा के बदले सम्प्रभुता युक्त भूभाग के भविग्रहण को प्राथमिकता दी (पैसे के स्थान पर)
→ (iv)वेलेजली में जिन राज्यों से संधि की उनमें प्रमुख थे- हैदराबाद अवध, पेशवा, सिंधिया।
संधि के प्रावधान
रक्षा→( i.)संधि कर्ता राज्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी कंपनी पर होगी।
भू-भाग -(ii.)इसके एवज में संधिकर्ता राज्य के द्वारा कंपनी को सम्प्रभुता युक्त भू-भाग दिया जायेगा।
विदेश नीति -(iii.)संधि कर्ता राज्य की विदेश नीति कंपनों के द्वारा संचालित होगी।
E/A-(iv) कंपनी के अनुमति के बिना ये राज्य यूरोपियन एवं अमेरिकन को अपनी सेवा में नहीं रखेंगे।
रेजीडेंट्स -(V.) संधिकर्ता राज्यों के दरबार में एक ब्रिटिश रेजीटेंट होगा। जो कि उस राज्य के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।
सहायक संधि से कंपनी को लाभ
(i.) रक्षा संबंधी प्रावधान के कारण कंपनों की सैन्य स्थिति मजबूत हुई। विशाल सेना का गठन हुआ। इस सेना का उपयोग भारत एवं भारत से बाहर साम्राज्य की सुरक्षा तथा साम्राज्य के विस्तार के लिए किया गया। और कई अवसरों पर संधिकही राज्य को जीतने के लिए भी।
(ⅱ.) न केवल विशाल सेना का गठन हुआ बतिक भारतीय राजस्व से सेना का गठन किया गया। अर्थात आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह अंग्रेजों के लिए यह लाभदायक था।
(iii.)सम्प्रभुता युक्त भू-भाग के कारण साम्राज्य का विस्तार हुआ तथा कृषि और सुरक्षा की दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अंग्रेजों का नियंत्रण स्थापित हुआ।
(iv.)विदेश नीति पर नियंत्रण स्थापित कर भारतीय राज्यों को ब्रिटिश विरोधी किसी प्रकार का गठबंधन बनाने या उनमें भाग लेने से रोका गया।
(V.) इसीप्रकार यूरोपियन अमेरिकन इत्यादि प्रप्रधानों के कारण निर्भर राज्यों को यूरोपियन राष्ट्रों से भी संपर्क स्थापित करने से रोका गया।
( Vi.) रेजीडेंट्स के कारण निर्भर राज्यों के आंतरिक मामलों में भी कंपनी का हस्तक्षेप बढ़ा। जैसे-उत्तराधिकार एवं प्रशासनिक मुद्दों पर। कई अवसरों पर निर्भर राज्यों के ब्रिटिश साम्राज्य में विलय में रेजीडेट्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
नोट-सहायक संधि के कारण एक तरफ कंपनी को जो लाभ हुआ दूसरी तरफ भारतीय राज्यों का वह नुकसान था।
~वेलेजली ने कर्नाटिक के शासक को पेंशन देकर प्रशासन का दायित्व अपने हाथों में लिया।
इस टापिक में देखा कि “वेलेजली एवं साम्राज्य विस्तार” के बारे में जानकारी दी गई। यूपीएससी परीक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। अगर यूपीएससी का तैयारी कर रहे हैं।इस वेबसाइट को जरूर पढ़ें और फोलो करें और दुसरो को शेयर करें जो भी एसपेरेंट हैं।

