अपनी साखियों में संत क्या कहते हैं?-भाग२
🙏जयगुरु 🙏
आप लोगों के लिए स्वामी छोटेलाल बाबा द्वारा रचित पुस्तक अपनी साखियों में संत क्या कहते हैं?-भाग२ से बहुत ही सार गर्वित बातों को आप लोगों के लिए लाए हैं ।अगर आप पढ़ेंगे तो आपके मन में जो भी जिज्ञासा है उसका समाधान अवश्य होगा जो भी मन में प्रश्न है उसका उत्तर जरूर ही आपको मिलेंगे ।क्योंकि सभी प्रश्नों का उत्तर हमारे गुरु सदगुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज महाराज द्वारा रचित पुस्तक “महर्षि मेंहीं पदावली” में है। पदावली को तो सब पढ़ते हैं लेकिन उसका अर्थ बहुत ही गहन है। बहुत ही मार्मिक है। तो आप सभी लोग के लिए “ अपनी साखियों में संत क्या कहते हैं?-भाग२ से प्रश्न और उत्तर का एक लंबा श्रृंखला का अवलोकन करते हैं ।जिससे आपके मन के संशय का समाधान हो सके।
14. क्या भोजन का प्रभाव मन पर भी पड़ता है?
उत्तर -हाँ, भोजन का प्रभाव मन पर भी पड़ता है। आप जैसा भोजन करेंगे, वैसा प्रभाव आपके मन पर पड़ेगा।
“जैसा भोजन खाइए, तैसा ही मन होय ।
जैसा पानी पीजिए, तैसी बानी होय ।।”
15. किसको कहीं अपमानित होना नहीं पड़ता है?
उत्तर -जो कहीं में बहुत सोच-विचार करके बोलता है और बहुत सोच-समझकर किसी स्थान पर बैठता है, उसे कभी कहीं अपमानित नहीं होना पड़ता।
“बोलै बोल बिचारिके, बैठे ठौर सँभारि ।
कहै कबीर ता दास को, कबहुँ न आवै हारि ॥”
16. आप समाज के लोगों को अपना कैसे बना सकते हैं?
आप समाज के लोगों के प्रति मीठा वचन बोलकर और उनके प्रति नम्र व्यवहार करके उन्हें अपना बना सकते हैं। कौआ किसी का धन नहीं हरता है, वह अपनी कर्कश वाणी के द्वारा ही लोगों को अप्रसन्न करता है। कोयल किसी को उपहार के रूप में कुछ भी नहीं देती है, वह अपनी मीठी वाणी सुनाकर ही लोगों को अपने प्रति प्रसन्न करती है।
“कागा काको धन हरै, कोयल काको देत ।
मीठा सब्द सुनाय के, जग अपनो करि लेत ।।”
17. जगत् के किसी एक सत्य का उल्लेख करें?
उत्तर -जगत् का एक सत्य यह है कि जो एक दिन उदित होता है, वह एक दिन अस्त जाता है; जो फूल एक दिन खिलता है, वह एक दिन मुरझा जाता है। जो इमारत एक दिन खड़ी की जाती है, वह एक दिन ढह जाती है और जो एक दिन उपजता है, वह एक दिन बिनस जाता है।
“जो ऊगै सो अत्थवै, फूलै सो कुम्हिलाय ।
जो चुनिये सो ढहि परै, जामै सो मरि जाय ।।”
18. जीवन को सफल कैसे बनाया जा सकता है?
उत्तर -ईश्वर की भक्ति करके, अपनी अर्जित संपत्ति का दान करके और अपनी विद्या-बुद्धि को दूसरे की भलाई में लगाकर जीवन को सफल किया जा सकता है।
“हाड़ बड़ा हरि भक्ति कर, द्रव्य बड़ा कछु देह ।
अकिल बड़ी उपकार कर, जीवन का फल येह ।।”
19.सांसारिक प्रेम क्या हमें फिर संसार में ले आता है?
– हाँ, सांसारिक प्रेम हमें फिर संसार में ले आता है। राजा भरत ने मरते समय एक हिरन का चिन्तन किया था, इसीलिए दूसरे जन्म में वे हिरन हुए। उनका हिरन का शरीर छूटा, तो तीसरे जन्म में वे ब्राह्मण-कुल में उत्पन्न हुए।
“एक मोह के कारने, भरत धरी दो देह ।
ते नर कैसे छूटिहैं, जिनके बहुत सनेह ।।”
20. क्या दूसरे की बुराई करने से अपनी भलाई हो सकती है?
उत्तर -नहीं, दूसरे की बुराई करने से अपनी भलाई. नहीं हो सकती। दूसरे की बुराई करने से अपनी भी बुराई होगी, अपनी भलाई नहीं; जिस प्रकार कोई बबूल का पौधा लगाए, तो वह उससे कभी आम का फल प्राप्त नहीं कर पाएगा।
“करै बुराई सुख चहै, कैसे पावै कोय ।
रोपे पेड़ बबूल के,आम कहाँ ते होय ॥”
21. गुरु को कैसा होना चाहिए और शिष्य को कैसा ?
उत्तर -गुरु को ऐसा होना चाहिए कि वे शिष्य से कुछ भी नहीं लें और शिष्य को ऐसा होना चाहिए कि वह अपना सब कुछ गुरु को अर्पित कर दे।
“गुरु तो ऐसा चाहिए, सिष सों कछू न लेय ।
सिष तो ऐसा चाहिए, गुरु को सब कुछ देय ॥”
22. घर पर आये हुए साधु को क्या खाली हाथ विदा करना चाहिए?
उत्तर -नहीं, घर पर आये हुए साधु को खाली हाथ कभी भी विदा नहीं करना चाहिए।विदा करते समय उनके हाथ में कुछ न कुछ उपहार के रूप में अवश्य देना चाहिए।
आज के अंक में पूज्य स्वामी छोटेलाल बाबा रचित पुस्तक अपनी साखियां में संत क्या कहते हैं?
में प्रश्न उत्तर का विशेष महत्व के साथ विश्लेषण किया गया है।इसे जरूर पढ़ें और शेयर करें तथा फोलो जरूर करें। और कमेंट करना नहीं भूले।
अपनी साखियों में संत क्या कहते हैं?-भाग२

