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महर्षि मेंहीं पदावली प्रश्नोत्तरी-भाग 4

By tarunsantmat.com

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महर्षि मेंहीं पदावली प्रश्नोत्तरी-भाग 4

मैं तरुण कुमार आप लोगों के लिए पूज्य स्वामी छोटेलाल बाबा रचित पुस्तक महर्षि मेंहीं पदावली की प्रश्नोत्तरी से प्रश्न और उत्तर का एक नया भाग 4 जिसका नाम दिए हैं। महर्षि मेंहीं पदावली प्रश्नोत्तरी -भाग 4 जिसमें कई प्रश्नों को बहुत ही आकर्षक तरीके से लिखा गया है।जिसे पढ़कर आप के मन आनंद से भाव विभोर हो जायेंगे। आइए महर्षि मेंहीं पदावली प्रश्नोत्तरी -भाग 4 का प्रश्न उत्तर नीचे पढ़ें 👇

18. जो अध्यात्मशास्त्र का प्रकाण्ड विद्वान् हो; परन्तु ध्यानाभ्यास नहीं करता हो, तो क्या उसे शान्ति मिलती होगी?

उत्तर -नहीं, ध्यानाभ्यास नहीं करनेवाले अध्यात्मशास्त्र के प्रकांड विद्वान को भी शान्ति नहीं मिलती।

वैशाख सकलो साख ग्रन्थन, की रहै जानत कोऊ ।ध्यान बिन मन अथिर जौं तो, शान्ति नहिं पावै सोऊ ॥(१३७ वाँ पद्य)

19. संत सद्गुरु की सेवा करने से क्या सभी देवी-देवताओं और परमात्मा की भी सेवा हो जाती है?

उत्तर- हाँ, गुरु की सेवा करने से सभी देवी-देवताओं और परमात्मा की भी सेवा हो जाती है।

देवी देव समस्त, पुरन ब्रह्म परम प्रभू ।

गुरु में करें निवास, कहत हैं संत सभू ॥

(९७ वाँ पद्य)

20.प्रतिदिन हमें क्या करना चाहिए?

उत्तर -प्रतिदिन हमें सत्संग-ध्यानाभ्यास करने के साथ साथ-झूठ ,चोरी, नशा, हिंसा तथा परस्त्रीगमन का त्याग करना चाहिए -,सत्संग नित अरु ध्यान नित, रहिये करत संलग्न हो ।व्यभिचार चोरी नशा हिंसा, झूठ तजना चाहिए ॥(७ वाँ पद्य)

21. किसी व्यक्ति की आध्यात्मिक साधना कैसे सफल हो सकती है?

उत्तर -गुरु की सेवा किये बिना और उनकी कृपा प्राप्त किये बिना किसी की भी आध्यात्मिक साधना सफल नहीं हो सकती-यह सार है सिद्धान्त सबका, सत्य गुरु को सेवना ।

‘मैंहीं’ न हो कुछ यहि बिना, गुरु सेव करनी चाहिए ॥

(७ वाँ पद्य)

बिन दया संतन की ‘मेंहीं’, जानना इस राह को ।

हुआ नहीं होता नहीं, वो होनहारा है नहीं ॥

(११७ वाँ पद्य)

‘मैहीं’ दास दया सतगुरु की, पाइय पद निरवाना ।

(८० वाँ पद्य)

२२. माया और विषय-सख का त्याग करना क्या सरल काम है)

उत्तर -नहीं माया और विषय-सख का त्याग करना सरल काम नहीं है-पल-पल मन माया रमे, कभुं विलग न होता ।(९वाँ पद्य)

मन अति कठिन कराल प्रभू हो,

तजय न विषय विकार ।

(२२ वाँ पद्य)

दुर्लभो विषयत्यागो दुर्लभं तत्त्वदर्शनम् ।

दुर्लभा सहजावस्था सद‌गुरोः करुणां विना ।।

(महोपनिषद्)

23.भजन-ध्यान हमसे कैसे बन सकता है?

उत्तर -हमसे भजन-ध्यान हो सके, इसके लिए गुरु-चरणों में हमारा प्रेम हो, हममें नम्रता हो और भजन ध्यान के प्रति हमारी आसक्ति हो -प्रेम दीनता भजन-सँग, तीनहु बने न कोइ ।

(११ वाँ पद्य)

24. साधक को भिक्षान्न पर अपना जीवन निर्वाह करना चाहिए या अपनी कमाई के अन्न पर?

उत्तर -साधक को अपनी कमाई के अन्न पर जीवन-निर्वाह करना चाहिए, भिक्षान्न पर नहीं-

जीवन बिताओ स्वावलंबी, भरम भाँड़े फोड़िकर ।

संतों की आज्ञा हैं ये ‘मेंहीं’, माथ धर छल छोड़िकर ॥(५३ वाँ पद्य)

25.’महर्षि मेंहीं-पदावली’ में परम मोक्ष की प्राप्ति के कितने कारण बतलाये गये हैं?

उत्तर-‘महर्षि मेंहीं-पदावली’ में मोक्ष की प्राप्ति के पाँच कारण बतलाये गये हैं; जैसे १. एक सर्वेश्वर पर ही अचल विश्वास तथा उनपर पूर्ण भरोसा, २. अपने अन्तर में ही सर्वेश्वर की प्राप्ति का दृढ़ निश्चय रखना, ३. सद्गुरु की निष्कपट सेवा, ४. सत्संग और ५. दृढ़ ध्यानाभ्यास।

(गद्यात्मक संतमत सिद्धान्त)

सभी सत्संगी बंधु और साधक जन, अभी तक आप लोगों ने महर्षि मेंहीं पदावली की प्रश्नोत्तरी -भाग 4 भी जरूर पढ़ें। इसमें महर्षि मेंहीं पदावली से अति महत्वपूर्ण टापिक और जीवन से जुड़ी हुई प्रश्नों को आप लोगों के लिए प्रेषित किया हूं। जो बहुत ही जीवन के लिए लाभकारी है।संतमत से जुड़े जितने भी साधक है उन सब के मन की बात है।इसको पढ़ने के बाद महर्षि मेंहीं पदावली प्रश्नोत्तरी -भाग 1 से 3 तक जरूर पढ़ें। बहुत ही आकर्षक तरीके से लिखा गया है। और साधक को जरूर शेयर भी करें।

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मैं तरुण कुमार मधेपुरा बिहार से हूं। I am blogger and digital creator.

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