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आंग्ल मैसूर युद्ध

By tarunsantmat.com

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आंग्ल मैसूर युद्ध
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आंग्ल मैसूर युद्धआंग्ल मैसूर युद्ध

मैं तरुण कुमार आप लोगों केलिए मॉडर्न इतिहास में आंग्ल मैसूर युद्ध का नोट्स का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत कर रहा हूं। जिसे पढ़कर आप यूपीएससी की तैयारी में एक अनूठा स्थान है।आप इसे कापी में लिखकर रिवीजन भी कर सकते हैं। बहुत सरल और सहज भाषा में है। उसका नोट्स नीचे हैं 👇

मैसूर पर वड्यार वंश का शासन था।( कृष्ण राज) वाडयार वंश पहले विजयनगर के अधीन था। विजयनगर के कमजोर पड़ते ही दक्षिणी कर्नाटक में इन्होंने स्वतंत्र राज्य की स्थापना कर ली थी।

हैदर अली मैसूर की सेना में एक घुड़सवार था ।और डिंडीगुल में उसने हथियारों के निर्माण के लिए एक कारखाना भी लगाया।

1716 ई. में हैदर अली ने मैसूर की सत्ता पर नियंत्रण स्थापित किया ।पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठों के पराजय एवं तृतीय कर्नाटक युद्ध तथा बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों के शामिल होने का फायदा उठाते हुए इसने केरल एवं तमिलनाडु के क्षेत्र में साम्राज्य का विस्तार किया।

प्रथम आंग्ल मैसूर युद्ध 1767 से 1769

1.हैदर अली की विस्तारवादी नीति से अंग्रेज ,निजाम तथा मराठे चिंतित थे। तीनों के बीच गठबंधन हुआ और मैसूर के साथ युद्ध की शुरुआत हुई।

2. 1769 में मद्रास की संधि के द्वारा युद्ध बराबरी पर समाप्त हुआ। दोनों ने एक दूसरे के विजित क्षेत्रों को लौटाया।

नोट-

१.युद्ध के प्रारंभ में निजाम एवं मराठे कंपनी के साथ थे ।आगे चलकर हैदर ने उन्हें अपनी तरफ मिलाया।

२. द्वितीय युद्ध के प्रारंभ में निजाम एवं मराठे हैदर के साथ थे ।आगे चलकर अंग्रेजों ने इन्हें अपनी तरफ मिलाया ।

३.तीसरे एवं चौथा युद्ध में निजाम एवं मराठों ने प्रारंभ से अंत तक अंग्रेजों का साथ दिया।

द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध 1780 से 1784

1.हैदर ने निजाम एवं मराठों को साथ लेकर अंग्रेजों से युद्ध प्रारंभ किया (मराठों एवं अंग्रेज के बीच पहला युद्ध प्रारंभ था। )

2.कुछ एक लड़ाईयों में हैदर को सफलता मिली। 1782 में हैदर की मृत्यु के पश्चात टीपू ने युद्ध का नेतृत्व किया ।अंतत: 1784 में मंगलौर की संधि के द्वारा युद्ध बराबरी पर समाप्त हुआ।

टीपू सुल्तान- एक खतरनाक शत्रु

आर्थिक क्षेत्र में

 १.टीपू सैनिक रूप से मैसूर को एक शक्तिशाली राज बनाना चाहता था। और उसके लिए आर्थिक विकास के महत्व को समझता था।

२. भू राजस्व के क्षेत्र में किसानों से राज्य के द्वारा प्रत्यक्ष संपर्क स्थापित किया गया ।तथा भू राजस्व वसूली की प्रक्रिया से मध्यस्थों को हटाया ।(साथ ही वह राजस्व में वृद्धि भी की)

३. मसालों के व्यापार पर राज्य का एकाधिकार समाप्त किया।

४. टीपू ने व्यापार के विकास के लिए वाणिज्यिक बोर्ड का गठन किया। तथा कई राष्ट्रों में व्यापारिक प्रतिनिधियों को नियुक्त किया।

५. टीपू ने राज्य में कागज, कपड़े, हथियार इत्यादि के उत्पादन को प्रोत्साहित किया।

2. सैन्य क्षेत्र में

१.टीपू ने फ्रांसीसियों के सहयोग से आधुनिक सेना का गठन किया।

दूसरे शब्दों में वेतन भोगी सेना ,आधुनिक तरीके से प्रशिक्षित सेना ,उन्नत हथियारों से युक्त सेना इत्यादि ।

 

२.नौसेना के विकास के लिए नौसेना बोर्ड का गठन किया। तथा बड़ी संख्या में डाकयार्ड एवं युद्धपोत के निर्माण की भी योजना बनाई।

३. टीपू सुल्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश विरोधी शक्तियों के साथ संपर्क बनाए रखने का प्रयास किया जैसे फ्रांस, तुर्की ,अफगानिस्तान ।

1790 के दशक में टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के विरुद्ध नेपोलियन से भी संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया।

अन्य –

१.टीपू सुल्तान फ्रांसीसी क्रांति के घटनाओं से परिचित था। फ्रांस से संबंधित जैकोबिन दल का सदस्य भी था तथा श्रीरंगपट्टनम में स्वतंत्रता की याद में एक वृक्ष लगाए ।

२.आधुनिक विचारों एवं अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को समझने वाले भारत का कोई भी शासक भारत में ब्रिटिश साम्राज्य विस्तार में बाधक हो सकता था यही कारण है कि अंग्रेज टीपू सुल्तान को सर्वाधिक खतरनाक शत्रु के रूप में देखे थे।

तृतीय आंग्ल मैसूर युद्ध 1790 से 1792

कारण- १.टीपू सुल्तान के द्वारा सैनिक एवं आर्थिक रूप से मैसूर को मजबूत बनाने के लिए उठाए गए कदम ।

२.फ्रांसीसी क्रांति के कारण फ्रांस में राजनीतिक अस्थिरता थी अंग्रेजों ने मैसूर के विरुद्ध युद्ध के लिए इसे एक अवसर के रूप में देखा ।

३.युद्ध से पूर्व (कंपनी) अंग्रेजों ने निजाम एवं मराठों को अपनी तरफ मिला लिया था ।इससे अंग्रेजों की स्थिति मजबूत थी ।

४केरल में कोचीन(मैसूर) एवं ट्रावणकोर (अंग्रेज) के बीच विवाद हुआ। और इसी के साथ युद्ध की शुरुआत हुई।

 

परिणाम- टीपू सुल्तान की पराजय ,एक बड़ी राशि टीपू को हर्जाने के रूप में देनी पड़ी तथा टीपू ने आधा भूभाग भी अंग्रेजों एवं उनके सहयोगियों को दिया।( 1793 में श्री रंगपट्टनम की संधि )

चतुर्थ आंग्ल मैसूर युद्ध 1799

१.टीपू सुल्तान की पराजय, लड़ते हुए मृत्यु २.मैसूर का अधिकांशत: भूभाग ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया गया और एक छोटा सा भूभाग वाडयार वंश के उत्तराधिकारी को दिया गया।

इस नोट्स में आज आंग्ल मैसूर युद्ध पर संपूर्ण परिचय एवं विश्लेषण को पढ़ लिया हूं। इससे पिछले सत्र में भी मोडर्न इतिहास का टापिक्स बताया गया है सभी को जरूर पढ़ें और दूसरों को भी बताएं।जो तैयारी में मील का पत्थर साबित होगा। धन्यवाद

 

 

 

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मैं तरुण कुमार मधेपुरा बिहार से हूं। I am blogger and digital creator.

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